WhatsApp के Username फीचर पर सरकार क्यों हुई अलर्ट? Meta को भेजा नोटिस, Telegram से क्या है पूरा मामला? जानिए

WhatsApp's username feature sparked a controversy

WhatsApp का नया Username फीचर अभी लॉन्च भी नहीं हुआ है, लेकिन इसे लेकर बड़ा विवाद शुरू हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने WhatsApp की पेरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजकर फिलहाल इस फीचर को भारत में रोलआउट नहीं करने के लिए कहा है।

आखिर ऐसा क्यों हुआ? Username फीचर क्या है, यह कैसे काम करेगा और इसकी तुलना Telegram से क्यों की जा रही है? आइए आसान भाषा में पूरी बात समझते हैं।

WhatsApp ला रहा है नया Username फीचर

WhatsApp लंबे समय से इंतजार किए जा रहे Username फीचर को लाने की तैयारी में है। फिलहाल कंपनी ने Username रिजर्व करने का ऑप्शन जारी कर दिया है।

दुनियाभर के यूजर्स को अपना Username सेट करने का विकल्प मिल रहा है। हालांकि, यह फीचर अभी पूरी तरह चालू नहीं हुआ है।

30 जून को WhatsApp ने कहा था कि यह फीचर यूजर्स की प्राइवेसी बढ़ाने के लिए लाया जा रहा है। जो लोग अपना मोबाइल नंबर शेयर नहीं करना चाहते, वे सिर्फ अपना Username देकर दूसरों से जुड़ सकेंगे। यानी बिना फोन नंबर दिखाए भी चैटिंग की जा सकेगी।

सरकार ने Meta को भेजा नोटिस

सूत्रों के मुताबिक, भारत सरकार ने Meta को नोटिस भेजकर कहा है कि फिलहाल इस फीचर को भारत में रोलआउट न किया जाए।

सरकार ने कंपनी से तीन दिन के भीतर इस फीचर की पूरी जानकारी भी मांगी है। जब तक सरकार और Meta के बीच इस मामले पर बातचीत पूरी नहीं हो जाती, तब तक इसे भारत में लॉन्च नहीं करने को कहा गया है।

क्या है WhatsApp Username फीचर?

अभी तक WhatsApp पर किसी से बात करने के लिए उसका मोबाइल नंबर होना जरूरी होता है। अगर किसी के पास आपका नंबर है, तभी वह आपको मैसेज भेज सकता है।

नए Username फीचर के आने के बाद हर यूजर अपने अकाउंट के लिए एक यूनिक Username चुन सकेगा।

इसके बाद किसी नए व्यक्ति को आपका मोबाइल नंबर जानने की जरूरत नहीं होगी। अगर उसके पास आपका सही Username होगा, तो वह सीधे आपसे चैट शुरू कर सकेगा।

WhatsApp का कहना है कि इसका मकसद लोगों की प्राइवेसी बढ़ाना है, ताकि हर किसी के साथ मोबाइल नंबर शेयर न करना पड़े।

हालांकि, कंपनी ने यह भी साफ किया है कि अगर किसी के पास पहले से आपका मोबाइल नंबर है या आप दोनों पहले से किसी ग्रुप में हैं, तो आपका नंबर उनसे छिपेगा नहीं। यह सुविधा मुख्य रूप से नई बातचीत के लिए होगी।

Username कैसे करेगा काम?

Meta के मुताबिक, यूजर्स WhatsApp Settings > Account > Username में जाकर अपना Username रिजर्व कर सकेंगे।

हर Username यूनिक होगा। यानी एक ही नाम दो लोग नहीं रख पाएंगे।

अगर आपका पसंदीदा Username पहले से किसी और ने ले लिया है, तो आपको दूसरा नाम चुनना होगा।

Meta इस सुविधा को धीरे-धीरे अलग-अलग देशों में शुरू करेगा। जब यह फीचर आपके लिए उपलब्ध होगा, तब आपको नोटिफिकेशन भी मिलेगा।

फिलहाल यह फीचर पूरी दुनिया में एक साथ चालू नहीं हुआ है। आने वाले महीनों में इसे फेज वाइज तरीके से जारी किया जाएगा।

क्या है WhatsApp Username Key?

इस फीचर के साथ WhatsApp एक अतिरिक्त सुरक्षा लेयर भी ला रहा है, जिसे Username Key कहा जा रहा है।

अगर कोई यूजर चाहे, तो वह अपने Username के साथ एक अलग Key भी जोड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में सिर्फ Username जानना काफी नहीं होगा। सामने वाले के पास Username के साथ वह Key भी होनी चाहिए, तभी वह नई चैट शुरू कर सकेगा।

इसका उद्देश्य यह है कि अगर आपका Username इंटरनेट पर कहीं शेयर भी हो जाए, तब भी कोई भी आपको सीधे मैसेज न भेज सके।

सरकार ने नोटिस क्यों भेजा?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता साइबर फ्रॉड और फर्जी पहचान को लेकर है।

अगर मोबाइल नंबर की जगह सिर्फ Username दिखाई देगा, तो कोई भी किसी कंपनी, सरकारी विभाग या किसी मशहूर व्यक्ति से मिलता-जुलता Username बनाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश कर सकता है।

सरकार का मानना है कि ऐसे फीचर को पूरी जांच के बिना लॉन्च करना सही नहीं होगा।

सूत्रों के मुताबिक, सरकार ने Meta से पूछा है कि ऐसे मामलों में फर्जी अकाउंट कैसे रोके जाएंगे, अपराधियों की पहचान कैसे होगी और जरूरत पड़ने पर जांच एजेंसियां कैसे कार्रवाई करेंगी।

Telegram से तुलना क्यों हो रही है?

WhatsApp का यह नया फीचर काफी हद तक Telegram के Username सिस्टम जैसा माना जा रहा है।

Telegram पर कई सालों से लोग Username के जरिए एक-दूसरे से संपर्क कर सकते हैं और कई मामलों में मोबाइल नंबर सामने नहीं आता।

NEET पेपर लीक विवाद के दौरान Telegram पर सवाल उठे थे। उस समय Telegram के फाउंडर ने कहा था कि अगर Telegram को बंद भी कर दिया जाए, तो अपराधी किसी दूसरे ऐप, जैसे WhatsApp, का इस्तेमाल कर सकते हैं।

NEET रीएग्जाम के दौरान सरकार ने एक हफ्ते के लिए Telegram ऐप को बैन कर दिया था।

अब WhatsApp भी Username फीचर ला रहा है। इसलिए सरकार यह समझना चाहती है कि कहीं वही समस्याएं यहां भी तो नहीं आएंगी।

हालांकि, सिर्फ Username होने का मतलब यह नहीं है कि किसी अपराधी को ट्रेस नहीं किया जा सकता।

कानून के तहत WhatsApp के पास अकाउंट से जुड़ी जानकारी रहती है और जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के जरिए जांच एजेंसियों को जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।

लेकिन आम यूजर को मोबाइल नंबर दिखाई नहीं देगा, जिससे शुरुआती पहचान मुश्किल हो सकती है। यही वजह है कि सरकार पहले इस सिस्टम को अच्छी तरह समझना चाहती है।

क्या बढ़ सकते हैं ऑनलाइन स्कैम?

साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सुरक्षा मजबूत नहीं हुई, तो फर्जी Username बनाकर लोगों को धोखा देने की कोशिश हो सकती है।

मान लीजिए कोई ‘rbi_help’ या ‘bank_help’ जैसा मिलता-जुलता Username बना ले। कई लोग उसे असली अकाउंट समझ सकते हैं।

इसी तरह किसी दोस्त के नाम से मिलता-जुलता Username बनाकर भी लोगों को फंसाने की कोशिश की जा सकती है।

हालांकि, Meta का कहना है कि उसने ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय तैयार किए हैं। साथ ही हाई-प्रोफाइल लोगों के Username पहले से रिजर्व किए जाएंगे, ताकि उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल न हो सके।

क्या इससे प्राइवेसी बढ़ेगी?

अगर सिर्फ प्राइवेसी की बात करें, तो यह फीचर कई लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

ऑनलाइन सामान खरीदते समय, किसी बिजनेस से बात करते समय या किसी नए व्यक्ति से संपर्क करते समय मोबाइल नंबर शेयर करने की जरूरत नहीं होगी। इससे आपका नंबर अनजान लोगों तक पहुंचने से बच सकता है।

लेकिन दूसरी तरफ, अगर पहचान छिपाना आसान हो जाता है, तो साइबर अपराधियों के लिए फर्जी प्रोफाइल बनाना भी आसान हो सकता है।

यही वजह है कि सरकार और Meta के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्राइवेसी और सुरक्षा के बीच सही संतुलन बनाने की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *